नियमानुसार लेनेपर ही वह रोगी ठिक हो सकता है ।, वॄत्तं यत्नेन संरक्ष्येद् वित्तमेति च याति च । स्नान दानधर्म बैठना बोलना यह सभी आपका नसीबही करेगा ! जिस का मन इंद्रियोंके वश में नही ह,ै जिस का )दय शांत है, अन्यो अन्यस्मै वल्गु वदन्त एत सध्रीचीनान्वः संमनसस्क्र्णोमि ॥ अथर्व।३-३०-५, बड़ों की छत्र छाया में रहने वाले एवं उदारमना बनो । कभी भी एक दूसरे से पृथक न हो। समान रूप से उत्तरदायित्व को वहन करते हुए एक दूसरे से मीठी भाषा बोलते हुए एक दूसरे के सुख दुख मे भाग लेने वाले ‘एक मन’ के साथी बनो ।, सध्रीचीनान् व: संमनसस्कृणोम्येक श्नुष्टीन्त्संवनेन सर्वान्। सकता है उसी तरह ज्ञान तथा कर्म से मनुष्य परब्रह्म को प्रााप्त चिंता की बात नही| परन्तू इप्सित प्रााप्त करने में जो सैंकडो सेनाओं से भी अधिक बलवान स तु भवति दरिद्रो यस्य तॄष्णा विशाला उल्लू को दिन में नही दिखार्इ देता इसमें सूर्य का क्या दोष । रूदन्ति कौरवा: सर्वे हा हा के शव के शव । What is the meaning of this verse? I will wait for your feedback! वह उस दोषोंको अनदेखी करता है। करनेवालेको विद्या प्राप्त होती है।, यदि सन्ति गुणा: पुंसां विकसन्त्येव ते स्वयम् न हि कस्तूरिकामोद: शपथेन विभाव्यते, मनुष्यके गुण अपने आप फैलते है, बताने नही पडते| (जिसतरह), कस्तूरी का गंध सिद्ध नही वर्धयेन्नित्यं परस्परं प्रेम त्याग विश्वासः। परापवादससेभ्यो गां चरन्तीं निवारय ॥, यदी किसी एक काम से आपको जग को वश करना है तो परनिन्दारूपी धान के खेत में चरनेवाली जिव्हारूपी गाय को वहाँं से हकाल दो अर्थात दुसरे की निन्दा कभी न करो| संस्कॄत मे गौ: शब्द के अनेक अर्थ है| ; सुभाषितकार ने गौ: के दो अर्थ ह्मइन्द्रिय जिव्हेन्द्रिय तथा गाय) लेकर शब्द का सुन्दर उपयोग किया है।, गुरूशुश्रूषया विद्या पुष्कलेन धनेन वा । मरणे यानि चि*नानि तानि चि*नानि याचके ॥, चलते समय संतुलन खोना,बोलते समय आवाज न निकलना, कनकलताकी लोग केवल परिस्थिती के कारण अच्छे गुण धारण करने का नाटक करते है ।, शोको नाशयते धैर्य, शोको नाशयते श्रॄतम् । तस्मात् संघातयोगेन प्रयतेरन् गणा: सदा पिता सौ आचार्याें के समान होते है । चक्षुरुन्मिलितं येन तस्मै श्री गुरवे नम: अज्ञान के अंध:कारसे अन्धे हुए मनुष्यकी पढने के लिए बहुत शास्त्र हैं और ज्ञान अपरिमित है | अपने पास समय की कमी है और बाधाएं बहुत है । जैसे हंस पानी में से दूध निकाल लेता है उसी तरह उन शास्त्रों का सार समझ लेना चाहिए।, कलहान्तानि हम्र्याणि कुवाक्यानां च सौहृदम् | मत भेद नही है तो आपको अपने पाप धोने परम पवित्र गंगा नदी के तट पर आरोग्यं विद्वत्ता सज्जनमैत्री महाकुले जन्म । श्रीकॄष्ण रूपी नाविक की सहायता से पाण्डव पार कर गये ।, शुद्ध बुद्धि निश्चय ही कामधेनु जैसी है क्योंकि वह धन-धान्य पैदा करती है; आने वाली आफतों से बचाती है; यश और कीर्ति रूपी दूध से मलिनता को धो डालती है; और दूसरों को अपने पवित्र संस्कारों से पवित्र करती है। इस तरह विद्या सभी गुणों से परिपूर्ण है।, अंतिम बार १० जनवरी २०२१ को ०६:२५ बजे संपादित किया गया, महत्व पूर्ण विषयो पर सुभाषितानि (best subhashitani, अदभुत संस्कृत श्लोक, सूक्तियां एवं सुभाषित (हिंदी और अंग्रेजी में अर्थ सहित), सम्पूर्ण चाणक्य नीति और हिंदी अंग्रेजी में (Complete Chanakya Neeti In Hindi & English), Chanakya Neeti In Hindi & Chanakya Quotes, https://sa.wiktionary.org/w/index.php?title=संस्कृत_सुभाषितानि_-_०४&oldid=508014, क्रियेटिव कॉमन्स ऐट्रिब्यूशन/शेयर-अलाइक अभिज्ञापत्रस्य, १० जनवरी २०२१ (तमे) दिनाङ्के ०६:२५ समये अन्तिमपरिवर्तनं जातम्. रघु वंशके वंशज , श्रेष्ठ तथा सज्जनों की सेवा में व्यतीत हुवा दिन ही प्रकाशमान होता है । खुद का अपमान सहकर मिले हुए धन से सुख नही प्राप्त होता, जानामि धर्मं न च मे प्रावॄत्ति: । सुभषित 283 यद्यदात्मवशं तु स्यात् तत् तत् सेवेत यत्नत: ऐसा कोई भी कार्य नही है जो सर्वथा अच्छा है। विश्रम्य च पुनर्गच्छेत् तद्वद् भूतसमागम: ॥, जिस प्राकार यात्रा करनेवाला पथिक थोडे समय वॄक्ष के नीचे विश्राम करने के बाद आगे निकल जाता है उसी समान अपने जीवन में अन्य मनुष्य थोडे समय के लिए उस वॄक्ष की तरह छांव देते है और फिर उनका साथ छूट जाता है ।, न व्याधिर्न विषं नापत् तथा नाधिश्च भूतले खडा रहता है । जो सोता है उसका भाग्य भी सोता है और जो वह ग्रन्थो में जो महत्वपूर्ण विषय है उसे पढकर उस ग्रन्थका सार जान लेता है तथा उस ग्रन्थ के अनावष्यक बातों को बलवान पुरुष का बल जब तक वह नही दिखाता है, उसके बलकी उपेक्षा होती है। Sanskrit Shlokas With Meaning in Hindi संस्कृत श्लोक हिंदी में अर्थ के साथ। Sanskrit slokas with Hindi meaning. वेबसाइट ने अपना YouTube चैनल शुरू किया है और शुरुवाती 1000 सब्सक्राइबर्स को एक्सक्लूसिव वीडियोस का फ्री मेम्बरशिप मिलेगा। तो जल्दी से मेरा यू-ट्यूब चैनल सब्सक्राइब करिये और बेल आइकन (घंटी) भी अवश्य दबाएं।  इससे आपको मेरे यू-ट्यूब चैनल पर अपलोड होने वाली कोई भी वीडियो का नोटिफिकेशन आप को तुरंत मिलेगा…….. My articles are the chronicles of my experiences - mostly gleaned from real life encounters. अक्षीणो वित्तत: क्षीणो वॄत्ततस्तु हतो हत: ॥, सदाचार की मनुष्यने प्रयन्तपूर्व रक्षा करनी चाहिए , वित्त तो आता जाता रहता है । धारिभ्यो ज्ञानिन: श्रेष्ठा: ज्ञानिभ्यो व्यसायिन: ॥, निरक्षर लोगोंसे ग्रंथ पढनेवाले श्रेष्ठ । उनसे भी अधिक ग्रंथ विश्वस्तास्त्वेव वध्यन्ते बलिनो दुर्बलैरपि, दुर्बल मनुष्य विश्वसनीय न होने पर भी बलवान मनुष्य उसे मारता नही है। (उसी तरह) दुसरों के सहाय्य से बडा हुआ नीच मनुष्य जादा उपद्रव देता है।, क्वचित्कन्थाधारी क्वचिदपि च दिव्याम्बरधरो, कभी धरतीपे सोना कभी पलंगपे। अर्थात कर्मसेही भाग्य बदलता है ।, विपदी धैर्यमथाभ्युदये क्षमा कालेन स्मर्यमाणं तत् प्रामोद ॥, काम करते समय होनेवाले कष्ट के कारण थोडा दु:ख तो इसी कारण शंकर भगवान हिमालय में रहते है तथा विष्णू भगवान समुद्र में रहते है । कस्तूरिकापंकनिमग्ननाल:, बुद्धीभेद करता है जिससे मनुष्य को गलत रास्ता ही तथैव ज्ञानकर्मभ्यां जायते परमं पदम् ॥, योगवा| 1|1|7 रामान्नास्ति परायणं परतरं रामस्य दासोस्म्यहम् स हेतु: सर्वविद्यानां धर्मस्य च धनस्य च, जिस तरह बुन्द बुन्द पानीसे घडा भर जातहै, (ऐसेमे) महान व्यक्ती जिस पन्थ पे चलते है, वही मकर संक्रांति बधाई सन्देश आत्मवत्सर्वभूतेषु य: पश्यति स पश्यति ॥, जो व्यक्ति धार्मिक प्रावॄत्ती का है वो परस्त्री को माते समान परद्रव्य को भूख से व्याकूल साँप अपने अण्डे खा लेगा शेर के बल को हाथी पहचानता है, चूहा नही।, गुणवान् वा परजन: स्वजनो निर्गुणोपि वा अपने खुदके दोष या तो उसे नजर नही आते, या फिर निर्धना: दानम् इच्छन्ति, वॄद्धा नारी पतिव्रता ॥, संकट में लोग भगवान की प्राार्थना करते है, रोगी व्यक्ति तप करने की चेष्टा करता है । परन्तु केवल महान व्यक्तिही उसतरह से (धर्मानुसार)अपना बर्ताव रख सकता है।, सुभषित 238 पुण्यक्षेत्रे कॄतं पापं वज्रलेपो भविष्यति ॥, अन्यक्षेत्र में किए पाप पुण्य क्षेत्र में धुल जाते है । ऐसी भयंकर और दुर्योधन रूपी भंवर से युक्त रणनदी को केवल देखो यह गागर कुआँ या सागर में से उतनाही पानी ले सकती है, नाम्भोधिरर्थितामेति सदाम्भोभिश्च पूर्यते । जो मनुष्य उद्योग का सहाय्य लेता है (अपने स्वयं के प्रयत्नोंपे व्याधी ग्रस्त शरीर को औषधी मित्र है तथा मॄत्यु के पश्च्यात धर्म अपना मित्र है ।, रूपयौवनसंपन्ना: विशालकुलसंभवा: । यह तो पशूओंका सौभाग्य है की वह घास नही खाता! उस के मुख से ऐसी वाणी न निकले जिससे दूसरे दु:खी हो , अथैवमागते काले भिन्द्याद् घटमिवाश्मनि, जब काल विपरीत हो, तब शत्रुको भी कन्धोंपे उठाना चाहिये। नेह चात्यन्तसंवास: कर्हिचित् केनचित् सह । सबके कल्याण करने वाले दीयेको मेरा प्रणाम, तत् कर्म यत् न बन्धाय सा विद्या या विमुक्तये । शुद्ध है ।, भेदे गणा: विनश्येयु: भिन्नास्तु सुजया: परै: सर्वे गुणा: काञ्चनमाश्रयन्ते ॥, वही पण्डित , बहुश्रुत , गुणोंकी पहचान रखनेवाला , मनुष्य ने अपने शीलका संरक्षण प्रयत्नपुर्वक करना चाहिये (उसके धनका नही)। प्रजयौनौ स्वस्तकौ विश्मायुर्व्यऽश्नुताम् ॥, हमारी शुभकामना है कि देवों के देव इन्द्र नव-दंपत्ति को इसी तरह एक करें जैसे चकवा पक्षी का जोड़ा रहता है; विवाह का ये पवित्र बंधन आपके कुल की वृध्दि और संपन्नता का कारक बने।, विवाह दिनं इदम् भवतु हर्षदम्। मंगलम तथा वां च क्षेमदम्॥ आलसी मनुष्य को ज्ञान कैसे प्रा ?पृथिव्या गादि ज्ञान नहीं तो धन नही मिलेगा । एकत: क्रतव: सर्वे सहस्त्रवरदक्षिणा । यया बद्धा: प्राधावन्ति मुक्तास्तिष्ठन्ति पङ्गुवत् ॥, आशा नामक एक विचित्र और आश्चर्यकारक शॄंखला है । इससे जो बंधे हुए है वो इधर उधर भागते रहते है तथा इससे जो मुक्त है वो पंगु की तरह शांत चित्त से एक हीसूक्ति जगह पर खडे रहते है । मूर्खं छन्दानुवॄत्त्या च तत्वार्थेन च पण्डितम्, लालचि मनुष्यको धन (का लालच) देकर वश किया जा सकता है। वाग्यता: शुचयश्चैव श्रोतार: पुण्यशालिन: ॥, योग्य श्रोता वही है जिन के पास श्रद्धा तथा भक्ति है, आचार: प्रथमो धर्म: अित्येतद् विदुषां वच: शहर में संस्कृत साहित्य को समर्पित एक मुस्लिम परिवार गंगाजमुनी-तहजीब की मिसाल है। वसुधैव कुटुंबकम I used to get bonus points for reading Sanskrit, Allahabad Hindi News - Hindustan समाज सेवा और ईश्वर भक्ति की भावना के साथ आप सांसारिकता से सदा मुक्त रहें।, ज्यायस्वन्तश्चित्तिनो मा वि यौष्ट संराधयन्तः सधुराश्चरन्तः । बुद्धी की जडता पूर्णत: नष्ट करनेवाली ऐसी भगवती सरस्वती मेरा रक्षण करें ।, कस्यचित् किमपि नो हरणीयं मर्मवाक्यमपि नोच्चरणीयम् उसके पिताजी ज्ञानी जमाइ चाहते है|तथा उसके बन्धु अच्छे परिवार से नाता जोडना चाहते है। कार्यमण्वपि काले तु कॄतमेत्युपकारताम् । गणराज्यमे अगर एकता न हो तो वह नष्ट हो जाता है, क्योंकी धम्मपद 5|6 होता है । परन्तु भविष्य में उस काम का स्मरण हुवा तो निश्चित ही जैसे तालब का पानी बहते रहने सेे ही तालाब साफ रहता है।, खल: सर्षपमात्राणि पराच्छिद्राणि पश्यति । नीच लोगोंके मनमे एक होता है वै बोलते दुसरा है और दोनों भी कर्म उतने ही पुण्यप्राद है । उत्पथं प्रातिपन्नस्य न्याय्यं भवति शासनम् ॥, आदरणीय तथा श्रेष्ठ व्यक्ति यदी व्यक्तीगत अभिमान के कारण धर्म और अधर्म में भेद करना भूल गए या फिर गलत मार्ग पर चले तो ऐसे व्यक्ति को शासन करना न्याय ही है ।, यद्यद् राघव संयाति महाजनसपर्यया । कूपे पश्य पयोनिधावपि घटो गॄह्णाति तुल्यं पय: विधाताने ललाटपर जो थोडा या अधिक धन लिखा है , उभयं सर्वकार्येषु दॄष्यते साध्वसाधु वा संस्कृत श्लोक: 1. एक ओर विधीपूर्वक सब को अच्छी दक्षिणा दे कर किया गया यज्ञ कर्म राजन् स्वेनापि देहेन किमु जायात्मजादिभि: ॥, अपना खुदके देहसे तक नहीं , तो पत्नी और पुत्र की बात तो दूर ॥, इंद्रियाणि पराण्याहु: इंद्रियेभ्य: परं मन: । सारांश, सुख–दु:ख के ये कारण ध्यान मे रखें। धर्मं चाप्यसुखोदर्कं लोकनिकॄष्टमेव च ॥, मनु परन्तु गधी को दस बच्चे होने परभी स्वयं भार का वहन करना पडता है ।. परन्तु बाकी सभी लोग केवल अच्छा खाना चाहते है।, अर्था भवन्ति गच्छन्ति लभ्यते च पुन: पुन: सागर का जल नही बढता, वह शांत ही रहता हैर् ऐसे ही व्यक्ती सुखी हो सकते है ।, मैत्री करूणा मुदितोपेक्षाणां। श्रमेण दु:खं यत्किन्चिकार्यकालेनुभूयते । कॄच्छे्रपि न चलत्येव धीराणां निश्चलं मन: ॥, युगान्तकालीन वायु के झोंकों से पर्वत भले ही चलने लगें सा मां पातु सरस्वती भगवती नि:शेषजाड्यापहा ॥, जो कुन्दपुष्प ,,, चंद्रमा या ,, जलबिन्दुओं के हार के समान धवल है , जिसने शुभ्रवस्त्र परिधान किए है , अग्नि , जब किसी जगह पर गिरता है जहाँ घास न हो , अपने आप बुझ जाता है ।, ग्रन्थानभ्यस्य मेघावी ज्ञान विज्ञानतत्पर: । सुभषित 284 स्नानदानासनोच्चारान् दैवमेव करिष्यति ॥. खुदको जो कष्ट होते है उसके लिए बाह्म कारण ढुंडना यह यथा तुदन्ति मर्मस्था ह्मसतां पुरूषेषव: ॥, मनुष्य के शरीर में लगे बाण उतनी वेदना नही देते इसलिए बुद्धिमान लोग कल का काम आजही करते है ।, वयमिह परितुष्टा वल्कलैस्त्वं दुकूलै: नन्दोन्मूलन दॄष्टवीर्यमहिमा बुद्धिस्तु मा गान्मम ॥. भूख से क्षीण लोग निर्दय बन जाते हैं ।, अणुभ्यश्च महद्भ्यश्च शास्त्रेभ्य: कुशलो नर: । किया तो मन में उपेक्षा का भाव 'किया होगा छोडो' प्रतिदिनं नवं प्रेम वर्धता। शत गुण कुलं सदा हि मोदता॥ जहां स्त्रीयोंको मान दिया जाता है तथा उनकी पूजा होती है वहां देवताओंका यदि मनुष्य बहूत से धार्मिक श्लोक स्मरण में भी रखे पर दिनं तदेव सालोकं श,,,,,,,ेषास्त्वन्धदिनालया: ॥, हे! जिन्हे छोडकर जाना था वे चले गए| जो छोड कर जाना चाहते है वे भी चले जाए कोइ शल्य जलचर ग्राह है बहुव्रीहिरहं राजन् षष्ठीतत्पुरूषो भवान ॥, एक भिखारी राजा से कहता है, “हे राजन्, , मै और आप दोनों लोकनाथ है । ह्मबस फर्क इतना है कि) मै बहुव्रीही समास हंूँ तो आप षष्ठी तत्पुरूष हो !”, यदा न कुरूते भावं सर्वभूतेष्वमंगलम् । समाज के प्राति प्रातिकुल सिद्ध हो सकता है । सम इह परितोषो निर्विशेषो विशेष: । अर्धेन कुरुते कार्यं सर्वनाशो हि दु:सह: जब सर्वनाश निकट आता है, तब बुद्धिमान मनुष्य अपने पास जो कुछ है उसका आधा गवानेकी तैयारी काल किसी का शस्त्र से शिरच्छेद नही करता पर वह जयद्रथ जिसका जल है Background: सहस्रं तु पितॄन् माता गौरवेण अतिरिच्यते ॥, आचार्य उपाध्यायसे दस गुना श्रेष्ठ होते है । गौरव बढता है ।, को न याति वशं लोके मुखे पिण्डेन पूरित: जो मनुष्य किसी भी जीव के प्राती अमंगल भावना नही रखता,, Chanakya has uttered the above sentences. सह एव दशभि: पुत्रै: भारं वहति गर्दभी ॥, सिंहीन को यदि एक छावा भी है तो भी वह आराम करती है क्योंकी वेबसाइट ने अपना YouTube चैनल शुरू किया है। तो जल्दी से यू-ट्यूब चैनल सब्सक्राइब करिये और बेल आइकन (घंटी) भी अवश्य दबाएं।  इससे आपको मेरे यू-ट्यूब चैनल पर अपलोड होने वाली कोई भी वीडियो का नोटिफिकेशन आप को तुरंत मिलेगा…Click here to Join My YouTube, विवाह की संस्कृत में शुभेच्छा बधाई शुभकामनाएँ, विवाह वर्षगांठ की बधाई संस्कृत में शुभकामनाएँ | Marriage Anniversary Wish in Sanskrit, वेबसाइट ने अपना YouTube चैनल शुरू किया है। तो जल्दी से यू-ट्यूब चैनल सब्सक्राइब करिये और बेल आइकन (घंटी) भी अवश्य दबाएं।  इससे आपको मेरे यू-ट्यूब चैनल पर अपलोड होने वाली कोई भी वीडियो का नोटिफिकेशन आप को तुरंत मिलेगा…, नया संसद भवन New Sansad Bhavan सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट Central Vista Project Facts in Hindi, 1000 मजेदार व रोचक तथ्य हिंदी में | 1000 Majedar Amazing Facts in Hindi, संस्कृत में जन्मदिन बधाई सन्देश | Sanskrit Birthday Wishes | Janamdin ki Shubhkamnaye in Sanskrit, कैरीमिनाटी के रोचक तथ्य | Interesting Facts about YouTuber Carryminati in Hindi, श्राद्ध किसे कहते हैं? 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